भारतीय कामगारों को अरब सरकार ने छोड़ा, नही होगा फाँसी

Kuwait में दो भारतीय नागरिकों को तब जीवन दान मिला जब उन्हें फांसी की सज़ा को उम्रकैद में तब्दील गया था। 17 जून 2013 को जब Suresh Shanmugasundram और Kalidas नाम के दो भारतीय को खबर मिली कि कुवैती अधिकारियों ने उनकी मौत की सजा को रद्द कर दिया है।

 

कुवैत जेल में लगभग एक दशक बिताए जाने के बाद, दोनों व्यक्ति Indian Embassy के निरंतर प्रयासों की बदौलत भारत सुरक्षित लाए गए है। दोनों सामाजिक कार्यकर्ता को भारतीय दूतावास के प्रयासों के कारण भारत पहुंचे। तमिलनाडु के रहने वाले सुरेश और कालिदास दोनों कुवैत में मौत की सजा का सामना कर रहे थे और 18 जून 2013 को फांसी दी जानी थी। तब कुवैत में भारतीय राजदूत Sri Sathish C Mehta ने तुरंत इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए कुवैत में बहुत वरिष्ठ अधिकारी के साथ मिलकर इस मामले को उठाया, और जिसके परिणामस्वरूप उनकी मौत की सजा को आजीवन कारावास की सजा में बदल दी गई थी ।

 

इस मामले को Indian Frontliners Mr. K. Mathi के द्वारा राजदूत के समक्ष उठाया गया था।पिछले हफ्ते, जब कुवैत सरकार ने लगभग 100 कैदियों को रिहा किया, तो सुरेश और कालिदास को भी रिहा कर दिया गया। दोनों भारत लौट आए और अपने परिवार के साथ फिर से मिल गए और वो दोनों ने अपने घर की ताज़ा हवा में सांस ली। Mr. P.P. Narayanan, भारतीय दूतावास के Community welfare Secretary, इन दोनों की रिहाई के लिए कुवैत सरकार के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे थे। बता दें कि Mr. P.P. Narayanan 30 अगस्त 2020 को job से retire हुए हैं, और उन्होंने अपनी retirement से पहले श्री सुरेश और कालिदास दोनों को मौत के मुँह से बचा लिया।

 

श्री सुरेश और कालिदास दोनों ने भारतीय दूतावास के अधिकारियों को उनकी निरंतर मदद और समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया। और उनके जीवन को बचाने और उनकी रिहाई के लिए एक लंबी लड़ाई के लिए समय रहते हुए इस मुद्दे पर हस्तक्षेप किया जिससे उन्हें रिहा कराया जा सका।

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