भारत वापस लौटा FLIGHT, सैकड़ों कामगार मुंबई में उतरे, सबको जैसलमेर ले जाने की तैयारी

कोरोना वायरस प्रभावित ईरान से भारतीयों को लेकर एक विमान शुक्रवार दोपहर मुंबई पहुंचा। ईरान कोरोनावायरस से सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक है और सरकार वहां फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए लगातार काम कर रही है। ‘ईरान एयर’ के विमान में कितने लोग सवार हैं इसकी तत्काल कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। अधिकारी ने बताया कि विमान करीब दोपहर 12 बजकर 08 मिनट पर मुंबई हवाई अड्डे पर उतरा।
 

अन्य एक अधिकारी ने बताया कि इन यात्रियों को एयर इंडिया के विमान से जैसलमेर ले जाया जाएगा। सेना के प्रवक्ता (राजस्थान) कर्नल सोमित घोष ने बताया था कि ईरान से लाए जाने वाले करीब 120 भारतीयों का पहला दल शुक्रवार को जैसलमेर पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि ईरान से लगभग 120 भारतीयों को लेकर एयर इंडिया का विमान 13 मार्च को जैसलमेर पहुंच रहा है। उन्हें जैसलमेर में सेना द्वारा तैयार पृथक केंद्र में रखा जाएगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा था कि 6000 से अधिक भारतीय ईरान के विभिन्न प्रांत में फंसे हैं।
 

गौरतलब हो कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरूवार को लोकसभा में कहा था कि कोरोनावायरस का फैलना गंभीर चिंता का विषय है तथा हम जिम्मेदारीपूर्वक इस पर प्रतिक्रिया दे रहे है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार ईरान, इटली समेत दुनिया के किसी भी भाग में रहने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
 

लोकसभा में कोरोनावायरस के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दिए गए बयान में जयशंकर ने कहा था कि इटली में फंसे भारतीयों की मदद के लिए चिकित्सा दल भेजा गया है और जो जांच में नकारात्मक पाए जाएंगे, उन्हें यात्रा की अनुमति होगी। वहां नोडल आफिस स्थापित किया जा रहा है।
 

ईरान में फंसे 6000 भारतीय
विदेश मंत्री ने कहा था कि ईरान में 6000 भारतीय फंसे हैं जिनमें महाराष्ट्र के 1100 तीर्थयात्री और जम्मू कश्मीर के 300 छात्र शामिल हैं। विदेश मंत्री ने कहा था कि प्रारंभिक जोर तीर्थयात्रियों को वापस लाने का है जिनमें अधिकतर ईरान के कोम में फंसे हैं। उन्होंने कहा था कि ईरान में फंसे भारतीयों में से 529 के नमूनों में 229 जांच में नकारात्मक पाए गए हैं।
 

जयशंकर ने बताया था कि ईरान में 1000 भारतीय मछुआरे फंसे हुए हैं और इनमें से कोई भी कोरोनावायरस से संक्रमित नहीं है। उन्होंने कहा था कि ईरान में व्यवस्था गंभीर दबाव में है और इसलिए हमें वहां मेडिकल टीम भेजनी पड़ी और बाद में क्लीनिक स्थापित करना पड़ा।

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