भारतीय प्रवासियों को मिल रहा था केवल दाल-भात, फँस गये थे खड़ी में, धनंजय दातार ने सबको किया मदद

संयुक्त अरब अमीरात में स्थित भारतीय बिजनेसमैन श्री धनंजय दातार ने फिर से 20 नाविकों को मदद किया है जो 10 महीने से यमन में फंसे हुए थे.  पूरी टोली में 14 भारतीय 5 बांग्लादेशी और एक  मिस्र से थे.

धनंजय दातार जोकि मसाला किंग के नाम से भी काफी पॉपुलर हैं उन्होंने सब को ₹20000 भी इमरजेंसी के तौर पर मदद करने हेतु इन कामगारों को दिया.

 यह नाभिक अपने जहाज को ऐसे जगह पर रुक कर खड़े हो गए थे जो एक War Zone में पड़ता था.  इसी बीच यमन के कोस्ट गार्ड में आकर पूरे के पूरे टीम को गिरफ्तार कर लिया और इन्हें शहर के एक होटल में ले जाकर आगे की पूछताछ के लिए रखा.  इन सब के सारे डॉक्यूमेंट और मोबाइल फोन पासपोर्ट को सीज कर लिया गया था.

पूरे ग्रुप को लगभग 6 महीने तक अपने बंधन में रखा और इन्हें किसी भी प्रकार के किसी भी संपर्क को नहीं करने दिया गया.  महज कुछ महीने पहले इन्हें अपने परिवार से बात करने के लिए मौका दिया गया और उसके बाद इसे मीडिया में जगह मिला जिसे हमारी न्यूज़ चैनल  GulfHindi.com ने भी काफी प्रमुखता से उठाया था और लगातार अधिकारियों के संपर्क और अपडेट लोगों तक जारी करते रहा था.

 

इसी दरमियान कुछ लोगों ने डॉ धनंजय दातार को भी इस बात की जानकारी दी और मदद के लिए गुहार लगाया,  बस इसके कुछ ही पल बाद Vipul, former Consul-General of India to Dubai  को डॉक्टर दातार ने  संपर्क किया और इस मामले में आगे बढ़े.

क्योंकि भारत का कोई भी दूतावास यमन में नहीं है अतः अशोक कुमार जो भारतीय एंबेसडर हैं और Djibouti में कार्यरत हैं उनसे मदद मांगा और आखिर कर इन्हें रेस्क्यू करने और आगे के मार्ग प्रशस्त करने का मार्ग खुलता चला गया.

 कामगारों ने बताई आपबीती.

कामगारों ने बताया कि 10 महीने विदेशी जमीन पर समय बिताने के साथ ही प्रतिदिन केवल दाल और चावल मिलना एक रात के बुरे सपने से कम नहीं था.  सब ने लगभग एक लाख तीन लाख तक इस नौकरी के लिए एक एजेंट को पैसे दिए थे और अब नहीं उनके पास कोई नौकरी थी ना ही कंपनी ने उनकी तनख्वाह दी थी और ना ही उनके पास किसी भी प्रकार की एक फूटी कौड़ी थी.

इसी दरमियान डॉक्टर दातार का यह मदद उनके लिए काफी प्रभावी रहा और इसके प्रति उन लोगों ने काफी सम्मान जताया.

अब तक डॉ धनंजय दातार ने लगभग 5000 भारतीय नागरिकों को मदद किया है बिना नौकरी और बिना पैसे के फंसे हुए थे.

एक प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉ धनंजय दातार ने कहा कि “मैंने कुछ भी बड़ा नहीं किया है बल्कि मैंने केवल वह किया है जो मुझे अपने देशवासियों के लिए ऐसे फंसे हुए स्थिति में करना चाहिए था.”

About Lov Singh

बिहार से हूँ, भारतीय होने पर गर्व हैं. मध्य पूर्व Asia से रूबरू कराता हूँ और फ़र्ज़ी खबरों की क्लास लगाता हूँ.
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