सऊदी अरब में फँसे 700 भारतीय कामगारों को धनंजय दातार और टीम के तरफ़ से टिकट और पूरी व्यवस्था, मिली वतन की मिट्टी

700 भारतीय कामगारों को मिला Dr. धनंजय दातार का साथ

मुसीबत के समय जो मदद करे वही सच्चा मित्र होता है|’ इस लोकोक्ति को सच करने वाला काम मसाला किंग डॉ. धनंजय दातार और उनके दुबईस्थित ‘अल अदील ट्रेडिंग’ समूह ने किया है| सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में पिछले चार महीनों से जेलों में बंद लगभग 700 भारतीय मजदूरों को छुडवाने के लिए तथा उनकी यातायात और भोजन की व्यवस्था करने के लिए डॉ.दातार और उनके सहकर्मियों ने अत्याधिक मात्रा में कोशिशें की हैं| अपने इस कार्य को करते समय आपने भारत की गरिमा को भी बनाए रखा है| अपने वतन लौटे इन  मजदूरों के आंखों में पानी था और उन्होंने डॉ. दातार को ‘अल अदील’ अर्थात भला आदमी बताते हुए अपनी कृतज्ञता दर्शाई|

सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में काम के सिलसिले से गए हुए ये भारतीय मजदूर करोना और लॉक डाउन के चलते वही फँस गए थे| कुछ एक के VISA की अवधि समाप्त हो गई थी फिर भी वे वहाँ रह रहे थे, कुछ लोगों की नौकरियाँ छुट गईं थीं, और वे कहीं पर भी किसी भी प्रकार का काम करते हुए अपना गुजारा कर रहे थे|  कुछ लोग तो इतने गरीब बन चुके थे कि वे भीख माँग रहे थे| ये सारी बातें स्थानीय कानून के खिलाफ होने के कारण सऊदी पुलिस ने इन्हें नजरबंद केंद्र में अर्थात (डिटेन्शन सेंटर) में भेज दिया था| जेल से छुटकर अपने वतन लौटने के ख्याल से ये  सारे मजदूर चिंतित थे| इस बारे में प्रसार माध्यमों में खबरे भी आ रही थीं|

 

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डॉ. धनंजय दातार को परेशानी पता चलते ही लिया Rescue का फ़ैसला.

जब यह बात डॉ. धनंजय दातार जी को पता चली तब उनका दिल पसीज कर रह गया| पाकिस्तान, श्रीलंका, जैसे पड़ोसी देशों ने अपने मजदूरों को ले जाने की व्यवस्था तुरंत की थी लेकिन भारतीय मजदूर चार महीनों से बिना-मतलब जेल में फंसे पड़े हैं, यह जानकर वे बेचैन हो उठें, और अपने देश बन्धुओं की मदद करने का फैसला उन्होंने कर लिया| संयुक्त अरब अमिरात और सऊदी अरब ये दोनों अलग-अलग देश होने के कारण एक देश से दूसरे देश में अधिकारीयों से काम करवाना इतना आसान नहीं था|  डॉ. दातार जी ने दुबई के भारतीय वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट) के जरिए सऊदी अरब के जेद्दाहस्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के साथ संपर्क स्थापित किया| स्थानीय प्रशासन को मानवतावाद का वास्ता देते हुए इन बेगुन्हा मजदूरों को जेल से रिहा करने के लिए मनाया, उन्होंने इस बात का आश्वासन दिया कि रिहा होते ही इन सब मजदूरों को भारत ले जाने का पूरा खर्चा वे उठाएँगे|

 

कोशिश ने लाया रंग, प्रवासियों ने छुआ वतन की मिट्टी.

सऊदी अरब के प्रशासन का सहकार्य, वहां के भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा कीए गए प्रयत्न और डॉ.दातार जी की बिना हार माने की कोशिशें,  इन सभी के कारण वे मजदूर हांल ही में मुक्त हो पाएँ हैं| भारत और सऊदी अरब में वर्तमान में विमान सेवाएँ बंद हैं| सऊदी प्रशासन ने और एक सहायता करते हुए इस सभी मजदूरों को सऊदीया एयरलाइन्स इस अधिकृत विमान सेवा द्वारा भारत में पहुँचाया| इन मजदूरों की जेद्दाह हवाई अड्डे तक पहुँचाने की व्यवस्था, उनकी वैद्यक-संबंधी जाँच और उनके खाने-पीने की पूरी व्यवस्था डॉ.दातार और उनके सहकारियों ने संभाली थी|इन मजदूरों में ४५१ मजदूर सऊदी एयरलाइन्स की दो विशेष फ्लाइट्स से दिल्ली के हवाई अड्डे पर और २५० मजदूर कोच्ची के हवाई अड्डे पर उतारे गए| दिल्ली में उतरे मजदूरों को दिल्ली और भटिंडा में संगरोध (quarantine) के लिए भेजा गया है|

 

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धनंजय कहते हैं “सेवा परम धर्म”

इस सन्दर्भ में अधिक  जानकारी देते हुए डॉ.दातार जी ने कहा, “ खाड़ी के देशों में फंसे निर्धन भारतीय मजदूरों के हवाई-जहाज का टिकट, उनका खाना-पीना और और उनकी वैद्यक जाँच का पूरा खर्चा उठाते हुए हम उन्हें सही-सलामत वापस लाने के काम में लगे हुए हैं| हमारे अल-अदील कंपनी द्वारा सामाजिक जिम्मेदारी उपक्रम (सीएसआर) के अंतर्गत अब तक लगभग ५००० जरुरतमंदों को यह सहायता देते हुए हमने भारत भेजा है| मैं अपने व्यवसाय के साथ-साथ खाड़ी-देशों में भारतीय संस्कृति के प्रचार और प्रसार के कार्य में भी सक्रिय हूँ| वैसे मुझे लगता है कि मैंने कुछ ख़ास नहीं किया है, मुसीबत के समय अपने भाइयों की मदद करना मानवता है, और भारतीय संस्कृति का एक भाग भी है| जेद्दाह में बुरे हालात में ७०० भारतीय मजदूर सऊदी अरब के जेलों में फंसे हैं, और, असहाय्य हैं,  यह सुनकर मैं बेचैन हो उठा और उन्हें पूर्ण रूप से मदद करना निश्चय कर लिया| सब लोगों की मदद के कारण अब ये मजदूर मुक्त हो चुके हैं और भारत पहुंचकर अपने परिवार के साथ संतुष्ट और सुरक्षित रहने वालें हैं, इस बात की मुझे विशेष रूप से ख़ुशी है|

About Lov Singh

बिहार से हूँ, भारतीय होने पर गर्व हैं. मध्य पूर्व Asia से रूबरू कराता हूँ और फ़र्ज़ी खबरों की क्लास लगाता हूँ.
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