दुबई के वो भारतीय बिज़नेस मैन जिनके माँ ने मंगलसूत्र तक दाव पर रखा, आज हैं करोड़ों के मालिक

  • “कुछ कर के दिखा दिया कि काम बहुत है
  • इस जहाँ में जीतने वाले मुकाम बहुत है
  • मुक्कमल शख्स वही जो दुनियां को बदल दे
  • वरना रोज़ मर मिटने वाले तो नाम बोहत हैं”

 

परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।

ये कहावत बिल्कुल सही है और मुझे उम्मीद है कि आप भी इस कहावत से भली भांति परचित होगें। आज हम बात करेगें धनंजय दातर की।

धनंजय दातर एक जाने माने और सफल व्यापारी है। वे बताते हैं कि bussiness उनके और उनके परिवार के बस की बात कभी थी ही नहीं वे तो एक accidental entrepreneure हैं। bussinesss करने का ख़्याल सबसे पहले उनके पिता के दिमाग के आया । उनके पिता जो हमेशा से एक emyloyee का काम करते हुए आये थे। जिनका दृष्टिकोण बेहद सामान्य था । उनके पिता का उनपे और खुद पे विश्वास , कुछ कर गुज़र जाने के जज़्बे और निडर व्यक्तित्व ने धनंजय दातर को उनके पिता के सपने और विचार को वास्तविकता मे बदलने के लिए मजबूर कर दिया। और उन्होंने दुबई में एक छोटी सी grocery शॉप खोल ली । पर जल्द ही उन्हें वास्तविकता से रूबरू होना पड़ा।

 

 

व्यापार शुरू करने के पहले ही साल में उन्हें बहुत नुकसान का सामना करना पड़ा इसका कारण था कि उन्होंने कम समय मे फायदे के लिए अपने व्यापार को बोहत बढ़ा दिया था। और जिन resellers को उन्होंने सामान दिया था उन्होंने उनका पैसा वापस ही नही किया। ये वो समय था जब उनकी स्थति बोहत दयनीय हो गई थी , अब उनके पास कुछ नहीं बचा था और उनके पिता पहले ही अपनी सारी जमा पूंजी अपने वयापार में लगा चुके थे। धनंजय दातर कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता को कई बार कहा भी की सब छोड़ छाड़कर वापस घर चलते हैं। पर वे नहीं माने।

 

 

वे आगे बताते हैं कि फिर व्यापार चलता रहे इसलिए उनके पिता ने किसी से पैसे उधार मांगे।लेकिन फिर भी कोई खास इजाफा उनके व्यापार में हो नहीं पाया और कुछ समय बाद उनका bussines बिल्कुल ही ठप हो गया।

 

 

वे कहते हैं कि फिर मेरे पिता ने मेरी माँ को एक पत्र लिखा। मेरी माँ कभी हार न मानने वाली, आत्मविश्वास से परिपूर्ण महिला थी।
उन्होंने घर का सारा फर्नीचर , बर्तन , गहने सब बेच दिया। यहाँ तक कि उन्होंने अपना मंगल सूत्र भी बेच दिया। एक भारतीय महिला के जीवन मे मंगल सूत्र की कीमत क्या होती है आप समझ सकते हैं।

 

वे कहते हैं उनकी माँ में सारा पैसा उन्हें भेज दिया ताकि वो अपना व्यापार फिर से शुरू कर सके ।

पैसों के साथ-साथ उनकी माँ में उनको एक पत्र भी लिखा। उन्होंने उसमे लिखा की – ” समय बदलता रहता है , और हमे कभी भी किसी नही डर से अपनी उम्मीद को नही मरना चाहिए और हमेशा अपने कदम आगे बढ़ाने चाहिए न की पीछे।”

वे बताते हैं कि -इस वाक्य ने मुझे पूरी तरह से बदल दिया और फिर मैंने ये फैसला कर लिया कि मैं घर खाली हाँथ वापस नहीं जाऊँगा।

 

उसके बाद मैंने उन्होंने 16-16 घण्टे काम करना शुरू किया और फिर 3 साल बोहत मेहनत के बाद उन्होंने अच्छा मुनाफा कमाया।
और फिर सबसे पहले उन्होंने अपनी माँ के लिए मंगल सूत्र खरीदा। वे कहते है कि हमारी सबसे बड़ी कमजोरी होती है कि हम हार मान जाते है और जिस दिन आप हार मानना छोड़ देते हैं आप कामयाब हो जाते हैं।

About Lov Singh

बिहार से हूँ, भारतीय होने पर गर्व हैं. मध्य पूर्व Asia से रूबरू कराता हूँ और फ़र्ज़ी खबरों की क्लास लगाता हूँ.
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