प्रवासियों के खेवनहार बने गिरीश, छह सालों में दुबई में फंसे 1500 लोगों की करा चुके वतन वापसी

एक नजर पूरी खबर 

  • छह सालों में दुबई में फंसे 1500 लोगों की करा चुके वतन वापसी
  • कोरोना काल में भी 250 लोगों को घर वापसी कराई
  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी कर चुके सम्मानित

Do at least one good deed a day, says social worker - News ...

बीते 12 साल पहले दुबई नौकरी करने गए उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के गिरीश प्रवासियों के लिए खेवनहार बने हुए हैं। वह लगातार खाड़ी देशों से भारतीय की वतन वापसी करने में खासा मदद कर रहे हैं। पिथौरागढ़ के गिरीश अपनी मेहनत के बूते बेहतर कॅरिअर बनाने के बाद दुबई में अच्छी नौकरी के झांसे में फंसे या अन्य वजहों से परेशान करीब डेढ़ हजार प्रवासियों को उनके घर भिजवाने का काम किया। ऐसे में कोरोना काल में वह वतनवापसी करने वालों के खेवनहार बने हुए है।

Girish Pant 🇮🇳 (@GirishPant_) | Twitter

गौरतलब है कि कोरोना काल में भी उन्होंने यूएई और भारत सरकार के बीच सेतु का काम करते हुए इमरजेंसी मामलों में फंसे करीब दो सौ लोगों को भारत भेजने की व्यवस्था की थी। ऐसे ही कार्यों की वजह से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गिरीश को वाराणसी में प्रवासी भारतीय अवॉर्ड से सम्मानित कर चुके हैं।

बता दे मूल रूप से बेड़ीनाग पिथौरागढ़ के रहने वाले गिरीश पंत का परिवार दिल्ली के सादतपुर में रहता है। बेड़ीनाग में उनके चाचा और अन्य परिजन रहते हैं। गिरीश साल 2008 में नौकरी के सिलसिले में दुबई चले गए थे। वर्तमान में वे कंस्ट्रक्शन कंपनी वीवर गल्फ में सीएसआर डायरेक्टर हैं।

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