पूरे अरब से भारत के Special Repatriation मिशन में गरीब कामगारों के लिए कोई जगह नही, इतना पैसा हैं तो देश की मिट्टी दिखेगी

सऊदी अरब,  संयुक्त अरब अमीरात,  खाड़ी देश समेत  विदेशों में फंसे हुए भारतीयों के लिए एक सुखद खबर है.  भारत में देशव्यापी लॉकडाउन लगाने के बाद अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. जिसके बाद भारतीय समुदाय बड़ी संख्या में विदेशों में फस गया.

 कुवैत कतर बहरीन सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात के साथ-साथ तमाम खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार कोरोनावायरस के मद्देनजर अपनी नौकरी गंवा बैठे,  जिसके उपरांत उन्हें कई प्रकार के समस्याओं का सामना करना शुरू हो गया.

 

 मदद के नाम पर भारत ने अब तक का सबसे बड़ा रिपेट्रिएशन मिशन शुरू किया तीन चरण में कई विमान संचालन की घोषणा की गई जिसमें मुख्य रुप से केरल की उड़ानें ज्यादा थी.  जब की खाड़ी देश में बिहार झारखंड उत्तर प्रदेश राजस्थान इत्यादि से भी काफी भारी संख्या में कामगार मौजूद हैं. 

 लेकिन मदद के नाम पर इन राज्य के कामगारों को अब तक कुछ भी हासिल नहीं हुआ.  भारत के द्वारा चलाए गए रिपेट्रिएशन मिशन में किसी भी प्रकार की रियायत ब्लू कॉलर कामगार से लेकर किसी भी प्रकार के भारतीय कामगार को नहीं मिली जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा करते हुए ब्लू कलर कामगारों के ऊपर अपनी गहरी संवेदना जताई थी और कहा था कि इनका ध्यान रखना हमारी पहली जिम्मेदारी है.  

 

लेकिन सामान्य दिनों में लगने वाले वायुयान के टिकट की कीमत दोगुना कर रिपेट्रिएशन मिशन चलाया गया, उसके बाद क्वॉरेंटाइन के नाम पर यह होटल में अनिवार्य रूप से रहने और उसका  शुल्क देने के नाम पर  विदेश से लौटकर आ रहे कामगारों के जेब  ढीले किए गए.

 भारतीय मिशन के तीसरे चरण में प्राइवेट एयरलाइन को मौका दिया गया है. लेकिन फ्लाइट के संख्या को काफी लिमिट कर दिया गया.  उम्मीद की जा रही थी कि तीसरे चरण में लोगों के परेशानियों पर से बोल थोड़ा कम हो सकेगा लेकिन ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया.

 

 हजारों की संख्या में कामगार ट्विटर हैंडल से लेकर सोशल मीडिया और सरकार को अपनी दुर्दशा बता रहे हैं लेकिन फ्लाइट में जगह पाने वाला रास्ता इतना आसान नहीं रहा.  सबसे पहले तो यहां से हुए कामगारों के लिए या फिर सहाय कामगारों के लिए मिशन आम नहीं बन सका क्योंकि इस मिशन में राहत पाने के लिए सबसे पहले आपको कम से कम 20 से 25000 का टिकट का भाड़ा देना होगा और उसके उपरांत क्वारंटाइन के नाम पर महंगे होटल का खर्च.

अगर कोई फंसा हुआ बेसहाय कामगार इस उम्मीद से इस मिशन को देखता है कि वह भारत सरकार के मदद के द्वारा भारत पहुंच जाएगा तो या एक बड़ी भूल के बराबर है.

 

 अब तक जितने भी भारत के द्वारा इस तरीके के मिशन चलाए गए हैं उसमें सारी व्यवस्था सरकार खुद करती थी लेकिन यह पहली बार है जब भारत सरकार के द्वारा कामगारों की मजबूरी में मटर गस्ती निकाली जा रही है.

About Lov Singh

बिहार से हूँ, भारतीय होने पर गर्व हैं. मध्य पूर्व Asia से रूबरू कराता हूँ और फ़र्ज़ी खबरों की क्लास लगाता हूँ.
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