दुबई से भारत Repatriation flight से ना आया भारतीय कामगार, रात में हुई मौत, अब पार्थिव शरीर दुबई पुलिस के पास

एक दुबई स्थित भारतीय प्रवासी कामगार जोकि भारत लौटने के लिए रिपेट्रिएशन फ्लाइट में जगह पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट दरवाजा खटखटाया आज उसके साथ एक बहुत बड़ी अनहोनी हो गई.

 29 साल के नितिन चंद्रन  एक कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करने वाले दुबई में भारतीय प्रवासी कामगार  थे.  आज सुबह 8 जून को उनकी मृत्यु हो गई.  यह और उनकी पत्नी ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में रिपेट्रिएशन फ्लाइट के शुरुआत होने से पहले लगातार कई बार याचिकाएं डाली जिसके बाद इन्हें मीडिया में काफी कवरेज मिला था और लोगों ने इनके प्रयासों की सराहना की थी.

 वंदे भारत मिशन के तहत पहली उड़ान जब दुबई से कोझिकोड के लिए तो 7 मई के दिन पहली उड़ान में इनकी पत्नी गीता जो कि 27 साल की थी और वह भारत आ  आ गई.  वह गर्भवती थी और अपने पहले बच्चे को जन्म देने वाली थी.

 भारतीय प्रवासी कामगार को पहले भी दिल का दौरा पड़ा था और ऐसी आशंका जताई जा रही है कि उनकी मृत्यु दिल के दौरे पड़ने से हुई है.

 रिपेट्रिएशन  फ्लाइट के जरिए प्रवासी कामगार वापस भारत तो नहीं आ सके लेकिन अब उनका मृत शरीर दुबई के पुलिस के पास रखा हुआ है और उनका कोविड-19 जाँच किया जाना बाकी है.  अगर नतीजे नेगेटिव आते हैं तो पार्थिव शरीर को भारत लाने की तैयारी की जाएगी.

 

 पत्नी के भारत लौटने के बाद नितिन  बैचलर एकोमोडेशन ने पिछले सप्ताह शिफ्ट हुए थे और उनके साथ दो रूम में और रह रहे थे,  सुबह में जब उनके साथ रहने वाले लोगों ने उन्हें जगाया ताकि वह काम पर जा सके तो उन्होंने कोई हरकत नहीं दिखाई जिसके बाद उन लोगों ने मेडिकल टीम को फोन किया और पता लगा कि वह गुजर चुके हैं.

 नितिन के करीबी मित्र ने बताया कि हम लोगों ने 2 जून को ही उनका 29 साल होने पर जन्मदिन मनाया था.  वह पिछले साल नवंबर में दिल के दौरे पड़ने से रसीद अस्पताल में भर्ती हुए थे जहां उन्हें 6 दिन के लिए रखा गया था.

 

 

 नितिन की पत्नी अब महज कुछ सप्ताह में नए बच्चे को जन्म देने वाली हैं.  नितिन ने अपने पत्नी को केरल इसलिए भेज दिया था क्योंकि वह खुद कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम कर रहे थे जहां पर संक्रमण की संभावना बहुत ज्यादा थी वह नहीं चाहते थे कि उनके गर्भवती पत्नी और आने वाले बच्चे के ऊपर इस संक्रमण का प्रभाव पड़े.

 

 रिपेट्रिएशन फ्लाइट में नितिन ने अपना सीट इसलिए नहीं किया क्योंकि उन्होंने सोचा कि यह शायद किसी दूसरे इमरजेंसी वाले लोगों के लिए ज्यादा बेहतर होगा दुबई में रहने का फैसला किया और हालात सामान्य होने तक का इंतजार कर रहे थे.

About Lov Singh

बिहार से हूँ, भारतीय होने पर गर्व हैं. मध्य पूर्व Asia से रूबरू कराता हूँ और फ़र्ज़ी खबरों की क्लास लगता हूँ.
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