भारत में भी करोड़ों लोगों की कोरोना से मौत, बंद हो गये 1.7 करोड़ मोबाइल, भारतीय मीडिया सप्ताह भर में खोज लेगी सबके ठिकाने

लगभग इसी वक्त पिछले साल जब चीन में कोरोनावायरस के मामले काफी चरम पर थे और करोड़ों की संख्या में मोबाइल फोन के कनेक्शन कम होने की खबर भारतीय मीडिया ने चीन में हुए कोरोनावायरस महामारी के वजह से मौत करार दिया था और यह सिद्ध कर दिया था कि चीन में इतने लोगों का देहांत हो गया है जिसके वजह से इतने मोबाइल कनेक्शन बंद हो गए हैं.

 

छोटे चैनल हो या मेंस्ट्रीम की बड़ी टेलीविजन मीडिया सब ने टीआरपी इस नाम पर खूब बटोरा कुछ ने तो इसको सैटेलाइट की तस्वीरों से जोड़कर वहां पर रेडिएशन के आंकड़ों तक दिखाना शुरू कर दिया था. ऐसा लग रहा था जैसे मानो कि चीन में CIA और अन्य खुफिया एजेंसियों का काम भारतीय मीडिया को मिला हो और भारतीय मीडिया इसे काबिलियत से सौ गुना ऊपर जाकर कर रही हो.

 

खैर छोड़िए भारतीय मीडिया का यह पहली दफा नहीं है जब किसी मामले को बिना जानकारी के उस हद तक ला दिया हो जहां पर PSEUDO टीआरपी की बैटिंग की शुरुआत की जाती है.

 

नया मामला भारत से है जहां पर भारत की दूरसंचार कंपनियों की रेगुलेरिटी के प्राधिकरण TRAI  ने करोड़ों कनेक्शन बंद होने के नए आंकड़े बताए हैं.  अब मुझे डर है कि कहीं इस 1 सप्ताह के अंदर में भारतीय मीडिया कोरोनावायरस से भारत में करोड़ों लोगों की मौत हो गई है और सरकार इस आंकड़े को छुपा रही है और भारतीय मीडिया छुपे हुए करोड़ों  मृतक के पार्थिव शरीर को ना खोज निकालने क्योंकि अगर इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म की बात करें तो भारतीय मीडिया की क्रिएटिविटी के देखते बनती है.

 

 

अब समझिए पुरा गणित.

कोरोना संकट की वजह से लगे लॉकडाउन में भारत में 1.7 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर्स यानी सिम यूजर्स की संख्या घट गई है। ऐसा टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का दावा है। दरअसल, लॉकडाउन के कारण जब पैनिक की स्थिति बनी तो महानगरों में रहे वाले लाखों मजदूर और लोअर मिडल क्लास के लोग पलायन करने लगे और इसका व्यापक असर टेलिकॉम सेक्टर पर पड़ा।


इन मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या मार्च-जून यानी साल 2020 की दूसरी तिमाही में घटी है। आलम ये है कि जुलाई और अगस्त महीने के दौपान भी इसकी भरपाई नहीं हो पाई है। हालांकि, ग्रामीण मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या में जुलाई और अगस्त के दौरान बढ़ोतरी देखने को मिली है।

 


‘पलायन से टेलिकॉम कंपनियों को नुकसान’
Counterpoint Research के वाइस प्रेजिडेंट (रिसर्च) नील शाह का कहना है कि मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या में कमी ज्यादातर महानगरों में देखी गई है, वहीं ग्रामीण इलाकों में मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या में बढो़तरी हुई है। जुलाई तक ग्रामीण इलाकों में नए यूजर्स जुड़े हैं, उसके बाद अगस्त से कमी देखी गई है। यानी लॉकडाउन में जब मजदूर अपने गांव वापस आ गए तो उन्होंने या तो नए सिम लिए या पुराने वाले सिम रिचार्ज नहीं किए।

 

दरअसल, लॉकडाउन का कम इनकम वाली फैमिली पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा और इसका असर ये हुआ कि लाखों मोबाइल सब्सक्राइबर्स घट गए। उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान हालात सामान्य हो जाएंगे और मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़ेगी।


ग्रामीण इलाकों में मोबाइल सब्सक्राइबर्स बढ़े
Trai के मुताबिक, मार्च 2020 की तिमाही में भारत में मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या 115.7 करोड़ थी, जिनमें शहरी यूजर्स की संख्या 63.8 करोड़ और ग्रामीण यूजर्स की संख्या 51.9 करोड़ थी। मार्च के बाद भारत में लॉकडाउन लगा और फिर इसका लंबे समय तक असर रहा। अप्रैल-जून 2020 यानी इस साल की दूसरी तिमाही के आंकड़े जब सामने आए तो कुल मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या में 1.7 करोड़ कमी देखी गई।

 

इनमें शहरी इलाकों में 61.9 करोड़ और ग्रामीण इलाकों में 52.1 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर्स हैं। सबसे ज्यादा कमी शहरी इलाकों में दिखी, जहां लॉकडाउन के दौरान 1 करोड़ 90 लाख मोबाइल सब्सक्राइबर्स घट गए। वहं ग्रामीण इलाकों में 20 लाख से ज्यादा मोबाइल सब्सक्राइबर्स बढ़ गए।



पूरे आँकड़े इस प्रकार हैं.


सबसे खास बात ये है कि कोरोना संकट काल के दौरान रिलायंस जियो ने एक करोड़ नए सब्सक्राइबर्स जोड़ लिए।

  • जहां मार्च 2020 में भारत में कुल जियो यूजर्स की संख्या 38.7 करोड़ थी, वहीं जून 2020 के दौरान जियो मोबाइल यूजर्स की संख्या बढ़कर 39.7 करोड़ हो गई।
  • वहीं इस अवधि में एयरटेल के 1.1 करोड़, वोडाफोन के 1.4 करोड़ और बीएसएनएल के 10 लाख सब्सक्राइबर कम हो गए।
  • मोबाइल सब्सक्राइबर मार्केट शेयर में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी जियो की है, जो कि जून 2020 के दरमियां 34.9 फीसदी है।
  • वहीं एयरटेल की 27.76 फीसदी, वोडाफोन की 26.57 फीसदी और बीएसएनएल की 10.37 फीसदी है।

 

आलेख: Lov Kumar Singh
(https://www.instagram.com/nyabihar/)

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